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Wednesday, 25 July 2012

वो कोई और था

















वो कोई और था जिसे तुमने देखा था,
जो हर बात में मुस्कुराता ,
जो वक़्त चहकता रहता था,
हर ख्वाब को सच करने का हौसला रखता था,

वो कोई और था जिसे तुमने देखा था,

हर राह  में मंजिल पा लेता ,
हर सवाल का जवाब दे देता ,
हर मुसीबत  का हल दिमाग में रखता था,

वो कोई और था जिसे तुमने देखा था,
जो एक उदाहरण था ,
जो एक नीसां था जीत का ,
हर जीत के बाद नयी जंग की राह ताकता था,

वो कोई और था जिसे तुमने देखा था,
आज वो खुद जूझ रहा है,
अपने वजूद को बचाने में,
अपनी मंजिल तलासने में,
वो शायद वो ही है जिसे तुमने  देखा था,

मगर आज वो वो नही रहा,
वो बहुत बदल गया है,
इक ईमारत हुआ करता था जो,
अब बस खंडहर रह गया है
एक खंडहर रह गया है।

Tuesday, 26 June 2012

आसां नहीं


दिल की बात को जुबां पे लाना इतना आसां नहीं,
अपनों को अपनी बात समझाना इतना आसां नहीं,
अपने ही ख़्वाबों का सौदा करना इतना आसां नहीं,
जहाँ के लिए खुद को भूल जाना इतना आसां नहीं,
जिंदगी के सफ़र में मंजिल पाना इतना आसां नहीं,
सफ़र में किसी का साथ पाना भी इतना आसां नहीं,
खुद पर ही हर इलज़ाम लगाना इतना आसां नहीं,
हर ज़ुल्म की खुद को सजा देना इतना आसां नहीं,
जैसा दिखता है जहाँ ये जहाँ भी इतना आसां नहीं,
खुद को इस जहाँ से ही बचा पाना इतना आसां नहीं ||

Saturday, 16 June 2012

वक़्त रुकता नही

ना मुहब्बत ना दोस्ती के लिए
वक़्त रुकता नही किसी के लिए
दिल को अपने सज़ा न दे यूं ही
इस ज़माने की बेरुखी के लिए
कल जवानी का हश्र क्या होगा 
सोच ले आज दो घड़ी के लिए 
हर कोई प्यार ढूँढ़ता है यहाँ 
अपनी तनहा सी ज़िंदगी के लिए 
वक़्त के साथ साथ चलता रहे 
यही बेहतर है आदमी के लिए ||

Wednesday, 6 June 2012

भूल गए


याद  नहीं  क्या  क्या  देखा  था  सारे  मंज़र  भूल  गए , 
उस  की  गलियों  से  जब  लौटे  अपना  भी  घर  भूल  गए ,
खूब  गए  परदेस  की  अपने  दीवार -ओ  - दर  भूल  गए ,
शीश -महल  ने  ऐसा  घेरा  मिट्टी  के  घर  भूल  गए ,
तुझ  को  भी  जब  अपनी  कसमें  अपने  वादे  याद  नही  ,
हम  भी  अपने  ख़्वाब  तेरी  आँखों  में  रख  कर  भूल  गए ,
मुझ  को  जिन्होंने  क़त्ल  किया  है  कोई  उन्हें  बतलाये  "देवा " ,
मेरी  लाश  के  पहलू  में  वो  अपना  खंजर  भूल  गए ,
खंजर पर लगे खून के छीटों में हमारे करम धुल गए ,
मरना तो है सबको लेकिन हम तो जीना ही भूल गए ||

Tuesday, 5 June 2012

UMANG ( उमंग )

उठती सी उमंग है ज़िन्दगी में रोज नयी,
दिल में रोज एक बोझ सा रह जाता है ,
बेचैन सी निकल जाती है रात आँखों तले से,
उल्जे पन्नों  को सुल्जाने में भी डर सा लगता है,
सब जान कर भी नासमझ बना बैठा हु मैं,
इतना सोच कर भी वक़्त कम सा लगता है, 
डूब जाना चाहता हूँ में उजाले की गहराई में,
पर आँख खोल देखने का भी मन नही करता है,
बैठा रहूँ उस  राह पर जीवन भर ,
जिस  राह में साथ आपका अच्छा सा लगता है।।

Wednesday, 23 May 2012

किसी की याद आती रही

आज  गुमसुम  हवाएं लोरियां सी सुनाती रही ,
मेरी तन्हाई  फिर मुझे सताती रही ,
सन्नाटों को चीरती ,
किसी की याद आती रही ।

मेरी कलम  सफ़ेद  कागच  पर ,
लिख  लिख  कुछ  मिटाती  रही ,
सूखे से लबों पर जैसे 
कोई बात  आती सी रही,
किसी की याद आती रही ।

बीते हुए पल  कभी ना  लौटेंगे,
ना ही लौटेंगे दूर जाने वाले,
दोपहर में तेज  हवाएं गली में ,
जैसे धूल  उड़ाती सी रही,
किसी की याद आती रही ।

सूखे पत्तों की सरसराहट मुझे ,
किसी की याद  दिलाती रही ,
मेरी उँगलियाँ रेत  पर  जैसे ,
मेरी किस्मत  लिखती रही मिटाती  रही,
किसी की याद आती रही ।।



Monday, 9 April 2012

उम्मीद

I heard few lines few days before

उम्मीदों वाली धूप, Sunshine वाली आशा ....

बस यही सोच कर कुछ याद आ गया ....
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शाम का सूरज देखे अब तो अरसा हो चला है ,
चाँद भी देखा नही चांदनी को देखे अरसा हो चला है,
देर हो जाती है आज कल घर आते आते ,
थके होते है इतने के कैसे करे अपनों से बातें,
सवेरे की धूप भी अब तो आँखों में चुबती सी लगती है,
रात को चलती ठंडी हवा भी नींद कहाँ ला पाती है ,
बारिस के पानी से भी डर सा लगा रहता है,
नीर निगलते भी स्वाद बदला सा लगता है ,
अब तो बस यही उम्मीद सी रहती है ,
यूँ ही  ज़िन्दगी कटती सी लगती है ।।

What are I waiting for ?
another day another dawn.
some day I have to find a new way to peace.